8 जनवरी 2025 · 24-घंटे AI अपडेट: AWS का डबल-ट्रैक दांव (P6E + Trainium3), Alibaba का मल्टीमॉडल हार्डवेयर किट, और डेटा सेंटर में Arm का टर्निंग पॉइंट

आज की तीन खबरें एक ही दिशा में इशारा करती हैं: क्लाउड कंपनियाँ सिर्फ “ज़्यादा GPU” नहीं बेच रहीं, वे कंट्रोल चाहती हैं—पीक परफॉर्मेंस पर भी और लंबे समय की लागत/सप्लाई कर्व पर भी। साथ ही, मल्टीमॉडल डिवाइसेज़ के लिए “डिफ़ॉल्ट बेस लेयर” बनने की रेस तेज़ हो रही है, और Arm का उभार x86 की पारंपरिक पकड़ को धीरे-धीरे खिसका रहा है।

1. AWS ने GB NVL72 सिस्टम आधारित EC2 P6E इंस्टेंस लॉन्च किए और इन-हाउस Trainium3 UltraServer भी पेश किया

टिप्पणी:
AWS चिप → सर्वर → क्लस्टर → प्लेटफ़ॉर्म → एजेंट ऐप्स तक एक एंड-टू-एंड क्लोज़्ड लूप बना रहा है। रणनीति साफ़ है: सबसे कठिन फ्रंटियर ट्रेनिंग/इन्फ़रेंस के लिए टॉप-एंड NVIDIA रैक-स्केल सिस्टम, और मिड/लॉन्ग टर्म में लागत व सप्लाई कंट्रोल के लिए अपना Trainium।
इन-हाउस चिप “वास्तव में” एंटरप्राइज़ वर्कलोड खा पाएगा या नहीं, इसका फैसला स्पेक शीट से नहीं होगा—तीन चीज़ें निर्णायक हैं: सॉफ़्टवेयर स्टैक की परिपक्वता और माइग्रेशन घर्षण, एंड-टू-एंड क्लस्टर क्षमता, और ऐसा price/performance जो ग्राहक अपने वर्कलोड पर दोहरा सकें।
AWS दो हाथों से खेल रहा है: आज का पीक और कल का कंट्रोल। सवाल यह है—क्या ग्राहक इस डबल-ट्रैक रोडमैप को अपनाएँगे?

2. Alibaba Cloud ने AI ग्लासेस, लर्निंग डिवाइसेज़ आदि के लिए मल्टीमॉडल इंटरैक्शन डेवलपमेंट किट जारी किया

टिप्पणी:
यह किट सिर्फ “कुछ मॉडल जोड़ने” की बात नहीं है। इसमें Qwen/मल्टीमॉडल स्टैक के साथ-साथ कई प्री-बिल्ट एजेंट और MCP टूल्स भी दिए गए हैं, ताकि हार्डवेयर कंपनियाँ जल्दी से “सुनो-देखो-समझो-एक्ट करो” जैसी क्षमताओं को प्रोडक्ट में बदल सकें।
सबसे बड़ा संकेत इसका मल्टीमॉडल फ्यूज़न है—वॉइस, टेक्स्ट, इमेज, वीडियो को एक साथ जोड़ना, और डिवाइस-क्लाउड सहयोग के जरिए लेटेंसी को काफी नीचे रखना। रिपोर्टेड लक्ष्य आक्रामक हैं: एंड-टू-एंड वॉइस इंटरैक्शन <1 सेकंड, वीडियो इंटरैक्शन ~1.5 सेकंड, और कुछ कस्टम सीनारियो में ~1.3 सेकंड रिस्पॉन्स के साथ 98% एक्यूरेसी।
यह एक बड़ा दांव है कि मल्टीमॉडल हार्डवेयर स्केल करेगा। अगर Alibaba routing, डिवाइस-क्लाउड ऑर्केस्ट्रेशन, लागत और कंप्लायंस को “सच में प्रोडक्टाइज़” कर पाया, तो यह हार्डवेयर वेंडर्स के लिए डिफ़ॉल्ट बेस लेयर बन सकता है—वरना डेमो-लेयर पर अटकने का जोखिम रहेगा।

3. Arm के डेटा सेंटर CPU शेयर के “50%” दावे पर बहस है, लेकिन संरचनात्मक बदलाव साफ़ दिखता है

टिप्पणी:
Arm का 50% शेयर आंकड़ा विवादित हो सकता है, लेकिन Arm की ग्रोथ और क्लाउड के अंदर उसका स्ट्रक्चरल ब्रेकथ्रू वास्तविक है। Amazon/Microsoft जैसी कंपनियाँ Arm पर कस्टम चिप्स इसलिए बना रही हैं क्योंकि लक्ष्य है TCO (लागत) + ऊर्जा दक्षता + कस्टमाइज़ेशन + सप्लाई-चेन कंट्रोल। Arm का लाइसेंसिंग मॉडल और इकोसिस्टम इस दिशा में ज्यादा “फिट” बैठता है। NVIDIA जैसे प्लेयर्स का Arm-आधारित CPU की ओर जाना भी Arm को “क्लाउड-इंटरनल ऑप्टिमाइज़ेशन” से “जनरल डेटा सेंटर प्लैटफ़ॉर्म” की कहानी में आगे बढ़ाता है।
लेकिन पारंपरिक एंटरप्राइज़ डेटा सेंटर और जनरल सर्वर मार्केट में x86 का इकोसिस्टम अभी भी मजबूत दीवार है।
और सबसे अहम बात—मेट्रिक: 50% किस आधार पर? यूनिट्स, कोर काउंट, क्लाउड इंस्टेंस शेयर, या नई खरीद (new procurement mix)? डिनॉमिनेटर बदलते ही निष्कर्ष बदल जाता है।

समापन:
AWS का डबल-ट्रैक कंप्यूट, Alibaba का मल्टीमॉडल हार्डवेयर बेस-लेयर, और Arm का CPU नैरेटिव—तीनों में कॉमन थीम है: “डिफ़ॉल्ट प्लेटफ़ॉर्म” बनना। आपके हिसाब से 2025 में असली निर्णायक बढ़त किससे बनेगी—चिप्स, प्लेटफ़ॉर्म, या नया हार्डवेयर एंट्री पॉइंट?

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लेखक: Kairoनिर्माण समय: 2026-01-08 05:10:42
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